ज्योतिर्गण

अधिकार · दूसरा द्वार

जो पहले से मुफ़्त है

मानसिक स्वास्थ्य क़ानून कहता है कि इलाज पाना हर आदमी का अधिकार है, और जो ग़रीबी रेखा से नीचे है या बेघर है, उसके लिए सरकारी संस्थानों में यह पूरी तरह मुफ़्त है, कार्ड हो या न हो। यह माँगने की चीज़ नहीं है। यह लिखी हुई चीज़ है।

इलाज पाना आपका अधिकार है। यह किसी की दया नहीं है।

यह मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 में लिखा है। धारा 18: हर व्यक्ति को सरकार द्वारा चलाई या वित्तपोषित सेवाओं से इलाज पाने का अधिकार है।

और अगर आदमी ग़रीबी रेखा से नीचे है, या बेसहारा है, या बेघर है,

तो सरकारी संस्थानों में यह इलाज पूरी तरह मुफ़्त है। और उसी क़ानून में यह भी लिखा है: चाहे उसके पास बीपीएल कार्ड हो या न हो।

अब वह चीज़ जो इसी वक़्त, आपके हाथ में है।

14416। यह नंबर मुफ़्त है और चौबीस घंटे चलता है। टेली मानस, स्वास्थ्य मंत्रालय का कार्यक्रम। पहले एक परामर्शदाता उठाता है, और उसके पीछे मनोचिकित्सक तक पहुँच है। हर राज्य में, बीस भाषाओं में।

नाम बताना ज़रूरी नहीं। कहीं जाना ज़रूरी नहीं।

फिर आपके गाँव या क़स्बे का आयुष्मान आरोग्य मंदिर। वहाँ जो बारह सेवाएँ दी जाती हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य भी है और योग भी। कई जगह वहाँ एक योग प्रशिक्षक भी बैठता है।

फिर ज़िला। और ज़िले में एक पूरी टीम है, नाम के साथ।

मनोचिकित्सक, नैदानिक मनोवैज्ञानिक, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता, नर्स। ज़िला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम। यह टीम कहीं दूर नहीं है, यह ज़िला अस्पताल में है।

और नशामुक्ति के लिए अलग केंद्र हैं, जिनका ख़र्च केंद्र सरकार उठाती है। आईआरसीए और ज़िला नशामुक्ति केंद्र, राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत।

और नशा मुक्त भारत अभियान अब देश के हर ज़िले में है। 15 अगस्त 2020 को 372 ज़िलों में शुरू, और 15 अगस्त 2023 से हर ज़िले में।

इनमें से एक भी चीज़ आपने बनवाई नहीं है।

ये सब पहले से हैं, और आपके लिए हैं।

तीसरा घेरा · the third ringमन · the mind