ज्योतिर्गण

देहरी · पहला द्वार

इस घर ने क्या किया

आप बेकार नहीं बैठे थे। आपने देखा, गिना, छिपाया, लड़ा, और फिर चुप हो गए। यह सब आपने अकेले, रात में, ख़ुद सोचकर निकाला था, क्योंकि किसी ने आपको कुछ नहीं बताया था।

पहले एक बात, और यह सबसे ज़रूरी है।

आप बेकार नहीं बैठे थे। इन सालों में इस घर ने बहुत कुछ किया है, और वह कहीं दर्ज नहीं हुआ।

आपने देखा। आपने गिना। आपने पैसे छिपाए।

आपने झूठ पकड़े और फिर उन्हें छिपाया, बाहर वालों से।

आपने लड़ाई की, और फिर एक दिन लड़ना छोड़ दिया। चुप हो जाना भी हार नहीं थी। वह भी एक तरीक़ा था, जब बाक़ी तरीक़े ख़त्म हो गए।

और यह सब आपने अकेले सोचकर निकाला।

किसी ने इस घर को कभी कुछ नहीं बताया। डॉक्टर ने उससे बात की। पुलिस ने उससे बात की। किसी ने आपसे नहीं की।

तो जो कुछ हुआ, वह जानकारी न होने से हुआ, नीयत से नहीं।

अब एक बात है जो नापी जा चुकी है, और उसे बता देना ज़रूरी है।

जिस घर में आलोचना बहुत ज़्यादा होती है, वहाँ बीमारी ज़्यादा बार लौटती है। यह किसी एक बीमारी की बात नहीं है। यह कई अलग-अलग बीमारियों में, अलग-अलग देशों में, बार-बार दिखा है।

यह इसलिए नहीं कि कोई बुरा है।

यह इसलिए कि जिस आदमी की रोज़ आलोचना होती है, वह और भीतर चला जाता है। और जो भीतर चला गया, उस तक कोई बात नहीं पहुँचती, अच्छी भी नहीं।

और अब उसी खोज का दूसरा आधा हिस्सा, जो ज़्यादा ज़रूरी है।

यह बदला जा सकता है। यह घरों में बदला गया है, और बदलने के बाद नापा गया है। यह कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो किसी के स्वभाव में तय हो।

तो इस द्वार में किसी पर कोई दोष नहीं है।

इसमें सिर्फ़ वह है जो किसी ने आपको बताया नहीं था।

चौथा घेरा · the fourth ringपरिवार · the family