ज्योतिर्गण

गण · तीसरा द्वार

अगला गाँव

इस इलाक़े का अगला गाँव किसी काग़ज़ पर यक़ीन नहीं करेगा और किसी अफ़सर पर भी शायद नहीं। वह एक ही चीज़ पर करेगा: एक ऐसा गाँव जिसने यह कर लिया हो, और जो उसी बाज़ार में आता हो।

इस इलाक़े में एक और गाँव है।

वह वहीं है जहाँ यह गाँव कुछ साल पहले था।

और वह किसी काग़ज़ पर यक़ीन नहीं करेगा। न पोस्टर पर, न भाषण पर, न किसी बाहर से आए आदमी पर।

वह एक ही चीज़ पर यक़ीन करेगा।

एक ऐसा गाँव जिसने यह कर लिया हो, और जो उसी बाज़ार में आता हो।

और यह बात उसी रास्ते से जाएगी जिस रास्ते से गाँव की हर बात जाती है।

बाज़ार। बस। स्कूल। शादी। खेत की मेंड़। किसी अभियान की ज़रूरत नहीं है। रास्ता पहले से बना हुआ है और उस पर बहुत आवाजाही है।

और यह अगले गाँव के लिए ही नहीं है।

यह इस गाँव के लिए भी है। जो गाँव किसी और गाँव को दिखाता है, वह ख़ुद और मज़बूत होता है। यह वही बात है जो एक आदमी के बारे में कही गई थी, अब एक जगह के बारे में।

अब ज्योतिर्गण का दूसरा हिस्सा।

ज्योति एक हो सकती है। गण अकेले नहीं हो सकता।

गण का मतलब ही समूह है। यानी इस पूरे आंदोलन का नाम अकेले किसी आदमी पर पूरा होता ही नहीं। वह यहाँ आकर पूरा होता है।

और एक दीया दूसरे को जलाकर छोटा नहीं होता।

पाँचवाँ घेरा · the fifth ringगाँव · the village