घराना · दूसरा द्वार
घर से आगे कहानी नहीं जाती। ढंग जाता है। बच्चा यह नहीं ले जाता कि इस घर में क्या हुआ था; वह यह ले जाता है कि जब कुछ हुआ तब इस घर ने क्या किया। और वह चुनाव आज सुबह किया जा रहा है।
इस घर का बच्चा कुछ न कुछ ज़रूर ले जाएगा।
सवाल यह नहीं है कि ले जाएगा या नहीं।
सवाल सिर्फ़ यह है कि क्या।
और वह कहानी नहीं ले जाएगा। बीस साल बाद उसे यह याद नहीं रहेगा कि किस साल क्या हुआ था। उसे यह याद रहेगा कि जब कुछ हुआ, तब इस घर ने क्या किया।
अगर घर चुप हो गया था, तो वह चुप होना ले जाएगा।
अगर घर ने पहरा दिया था, तो वह पहरा देना ले जाएगा।
और अगर घर सुबह उठकर साथ बैठा था, तो वह वही ले जाएगा। बच्चे कही हुई बातों से नहीं सीखते। वे देखी हुई चीज़ों से सीखते हैं, और वे रोज़ देख रहे हैं।
अब यहाँ एक बात साफ़ कर देनी चाहिए, क्योंकि हर घर में यह डर रहता है।
यह पन्ना यह नहीं कहता कि यह चीज़ ख़ून से आगे जाती है।
यह पन्ना उससे कहीं ज़्यादा पक्की बात कहता है। ढंग ख़ून से नहीं जाता। वह देखने से जाता है। और देखने से जाने वाली चीज़ को बदलना आपके हाथ में है, आज।
इसीलिए इस घर के पास अभी एक चीज़ है जो बहुत क़ीमती है।
इस घर के पास यह तय करने का मौक़ा है कि आगे क्या जाएगा।
और वह तय बीस साल बाद नहीं होगा।
वह कल सुबह उस कोने में होगा।