ज्योतिर्गण

लोकलाज · दूसरा द्वार

वह किन दरवाज़ों को बंद करती है

लोकलाज कोई भावना नहीं है। वह एक दरवाज़ा है जो बंद होता है, और फिर दूसरा, और फिर तीसरा। इस द्वार में वे सब एक-एक करके गिनाए गए हैं, क्योंकि जिस चीज़ का नाम है उसे हटाया जा सकता है।

लोकलाज कोई भावना नहीं है।

वह दरवाज़ों की एक क़तार है, और वे एक-एक करके बंद होते हैं।

पहला दरवाज़ा: रिश्ता। और यह सिर्फ़ उसका नहीं होता। उसकी बहन का भी होता है, उसकी बेटी का भी। यह घर के उन लोगों पर गिरता है जिन्होंने कुछ नहीं किया।

दूसरा दरवाज़ा: काम।

तीसरा दरवाज़ा: उधार। दुकान का उधार, बीज का उधार, ब्याह का उधार। गाँव में उधार भरोसे पर चलता है, और भरोसा सबसे पहले जाता है।

चौथा दरवाज़ा: गवाही।

उसकी बात पर कोई यक़ीन नहीं करता, चाहे वह सच कह रहा हो। और जिस आदमी की बात पर यक़ीन नहीं होता, वह सच बोलना बंद कर देता है। यह उसकी चालाकी नहीं है, यह हिसाब है।

और पाँचवाँ दरवाज़ा, जो सबसे भारी है।

घर छिपाने लगता है।

और छिपाने वाला घर इलाज तक नहीं जाता। यही वह जगह है जहाँ लोकलाज सचमुच नुक़सान करती है। बाक़ी सब चोटें हैं। यह मौत का रास्ता है।

अब यह देखिए कि यह पूरी क़तार किस पर टिकी है।

वह किसी क़ानून पर नहीं टिकी। किसी फ़ैसले पर नहीं टिकी।

वह इस पर टिकी है कि लोग क्या कहेंगे। और यही उसकी कमज़ोरी है, क्योंकि यह वही चीज़ है जो गली में पाँच लोगों के बदलने से बदल जाती है।

पाँचवाँ घेरा · the fifth ringगाँव · the village