सुबह
जल नेति
गुनगुना, हल्का नमकीन पानी एक नथुने से डालिए, सिर थोड़ा झुका हुआ, और दूसरे से बाहर आने दीजिए। फिर दूसरी ओर से।
मुँह से साँस लेते रहिए। फिर नाक को धीरे से साफ़ कीजिए, ज़ोर से नहीं।
पहली बार शिविर में किसी सिखाने वाले के साथ सीखिए। इसके चित्र अभी नहीं हैं; यह शब्दों में है।
शाम
भ्रामरी
सीधे बैठिए, आँखें बंद, होंठ हल्के मिले हुए। अँगूठों से कान बंद कीजिए।
नाक से साँस भरिए। फिर पूरी बाहर की साँस पर भँवरे की तरह गुंजन, गले में, मुँह बंद।
हर गुंजन के बाद एक दीया छूइए, या गिनती ख़ुद रखिए। दस बार। इसके चित्र अभी नहीं हैं।
यह क्रम क्यों
इसी प्रोटोकॉल के साँस वाले अभ्यास के बाद, अफ़ीम पर निर्भर पुरुषों में साँस बड़ी और बाहर की रफ़्तार तेज़ नापी गई।
शुरू करने से पहले
अपनी सुविधा के भीतर ही कीजिए। ज़रा भी दर्द हो तो रुक जाइए। यह इलाज का साथ देता है, उसकी जगह नहीं लेता; जो ब्यूप्रेनॉर्फ़िन या मेथाडोन पर है, वह उस पर बना रहे।
जब तक अफ़ीम चल रही है, हर बार साँस रोकना छोटा रखिए।