भव · इसका अभ्यास: नींद

दिन में बनाइए, रात में आने दीजिए

नींद की गहरी परत दिन की मेहनत से बनती है। रात का काम बस शरीर की चौकसी को नीचे लाना है।

सूर्योदय

1

सूर्य त्राटक

सूरज उगते समय क्षितिज पर, या उसके पास के आकाश पर, नज़र; सूरज उग जाए तो बंद। उगी हुई थाली को कभी सीधे नहीं। इसका मार्गदर्शन आगे जोड़ा जाएगा।

शिविर में सिखाया जाता है · मार्गदर्शन आगे

दिन में

2

नौवाँ समूह · सूर्य

शरीर एक बार कंधों पर, फिर पीठ के बल। गर्दन में दर्द हो या रक्तचाप ऊँचा हो, तो पैर ऊपर नहीं जाते।

समूह शुरू कीजिए · परिचय
3

साइक्लिक मेडिटेशन

आसन और लेटकर आराम, बारी-बारी। शिविर में सिखाया जाता है; इसका मार्गदर्शन आगे जोड़ा जाएगा।

शिविर में सिखाया जाता है · मार्गदर्शन आगे

रात, सोने से पहले

4

शवासन में पूरी साँस

पीठ के बल, एक हाथ पेट पर, एक छाती पर।

नीचे से भरिए: पेट, छाती, हंसली। ऊपर से ख़ाली कीजिए, और बाहर की साँस को लंबी रहने दीजिए। कहीं रोकिए मत।

दस साँसें, फिर बस लेटे रहिए।

5

योग निद्रा

लेटकर, ध्यान शरीर में घूमता हुआ, नींद तक। शिविर में सिखाई जाती है; इसका मार्गदर्शन आगे जोड़ा जाएगा।

शिविर में सिखाया जाता है · मार्गदर्शन आगे
यह क्रम क्यों

दो बार साइक्लिक मेडिटेशन वाले दिन के बाद की रात में गहरी नींद ज़्यादा और जागना कम मिला; योग निद्रा ने पुरानी अनिद्रा में लगभग वैसा ही किया जैसा अनिद्रा का मानक व्यवहार-इलाज।

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शुरू करने से पहले

अपनी सुविधा के भीतर ही कीजिए। ज़रा भी दर्द हो तो रुक जाइए। यह इलाज का साथ देता है, उसकी जगह नहीं लेता; जो ब्यूप्रेनॉर्फ़िन या मेथाडोन पर है, वह उस पर बना रहे।

जब तक अफ़ीम चल रही है, हर बार साँस रोकना छोटा रखिए।

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