नाड़ी शोधन
Nāḍī Śodhana Prāṇāyāma
एक नथुने से भीतर, दूसरे से बाहर, फिर उलटी ओर से। साँस कहीं रोकी नहीं जाती।
समय कैसे रखें
बाहर की साँस कितनी लंबी
भीतर की साँस कितनी लंबी
यह कैसे होता है
एक हाथ काम करता है। दूसरा घुटने पर आराम करता है।
दाहिना हाथ, जैसे आईने में दिखे: दाहिने नथुने के लिए अँगूठा, बाएँ के लिए अनामिका।
- पालथी मारकर या वज्रासन में बैठिए। रीढ़ सीधी, कंधे ढीले, आँखें हल्के से बंद।
- बायाँ हाथ बाएँ घुटने पर, अँगूठा और पहली उँगली मिली हुई। दाहिने हाथ की पहली दो उँगलियाँ भीतर मोड़िए, अँगूठा और अनामिका खुली रहें: अँगूठा दाहिना नथुना बंद करता है, अनामिका बायाँ।
- अँगूठे से दाहिना नथुना बंद कीजिए। बाएँ से धीरे-धीरे साँस भीतर लीजिए।
- अनामिका से बायाँ बंद कीजिए, अँगूठा हटाइए, और दाहिने से साँस बाहर छोड़िए।
- दाहिने से भीतर लीजिए। उसे अँगूठे से बंद कीजिए, अनामिका हटाइए, और बाएँ से बाहर छोड़िए। यह एक चक्र हुआ।
- दस चक्र। साँस सहज और बिना टूटे, कभी ज़ोर से नहीं। ध्यान हवा पर रखिए, और उस पल पर जब वह ओर बदलती है।
शुरू करने से पहले
तीस सेकंड। फिर हम शुरू करते हैं।
- अगर आपका रक्तचाप (बीपी) काबू में नहीं है, साँस की गंभीर बीमारी है, या हाल में दिल की कोई तकलीफ़ हुई है, तो यह अभ्यास मत कीजिए। पहले डॉक्टर से पूछिए।
- कभी भी चक्कर आए, साँस फूले या तबीयत बिगड़े, तुरंत रुक जाइए और सामान्य साँस लीजिए। कुछ नहीं बिगड़ता। ठीक लगने पर दोबारा शुरू कीजिए।
- खाली पेट, या खाने के कम से कम दो घंटे बाद।
- साँस कहीं रोकी नहीं जाती। अगर लंबी बाहर की साँस के बाद अगली साँस हाँफकर भरनी पड़े, तो छोटी चुनिए। लंबा होने से ज़्यादा ज़रूरी है सहज होना।
- यह इलाज में सहारा देता है। इलाज की जगह नहीं लेता।
दस चक्र।
बाएँ और दाहिने, हर ओर से दस बार। साँस वहीं गई जहाँ आपने भेजा।