Phase four · Prāṇāyāma

The breath as instrument

Two practices are on this site, with the sessions that explain them. As the others are written they will appear here in the same form.

Tulasīdāsa

Hanumān Cālīsā

हनुमान चालीसा

Forty caupāīs to Hanumān, in Awadhi: no ghost comes near when his name is said, and every trouble is cut.

Why this one

Fear has two hymns here: Gajendra's, the call from inside the fear, and this one, courage that comes by remembering. Saṅkaṭa kaṭai miṭai saba pīrā, jo sumirai hanumata balabīrā: the trouble is cut and the pain goes for whoever remembers Hanumān.

It is Tulasīdāsa's, in Awadhi, not Sanskrit. The text is the one commonly printed, read on shlokam.org and checked against Kavita Kosh; an old font's ह्म where म्ह is meant (तुह्मरो for तुम्हरो) is mended. The sense given here is ours.

वाचिक: Said out loud, a line to a breath. The syllables light as you say them. उपांशु: The lips move and nobody across the room hears it. The text stays on the screen and stops moving. मानस: Nothing said, nothing shown. The breath and the place. अन्तर्यात्रा: The first third aloud, the second whispered, the last in the mind. Over a stotra this long the voice goes inward by itself; this simply agrees with it.

How to say it

The traditional three, and the order is a withdrawal inwards rather than a ladder. Nothing is locked.

You can stop anywhere. The page remembers the verse you reached, on this device only, and offers it when you come back.

The whole text

1

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि ।
बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥

2

बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन-कुमार ।
बल बुधि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार ॥

3

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर ।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥

4

राम दूत अतुलित बल धामा ।
अञ्जनि-पुत्र पवनसुत नामा ॥

5

महाबीर बिक्रम बजरङ्गी ।
कुमति निवार सुमति के सङ्गी ॥

6

कञ्चन बरन बिराज सुबेसा ।
कानन कुण्डल कुञ्चित केसा ॥

7

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेउ साजै ॥

8

सङ्कर सुवन केसरीनन्दन ।
तेज प्रताप महा जग बन्दन ॥

9

बिद्यावान गुनी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥

10

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
राम लखन सीता मन बसिया ॥

11

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥

12

भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥

13

लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥

14

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥

15

सहस बदन तुम्हारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥

16

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥

17

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥

18

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा ।
राम मिलाय राज पद दीन्हा ॥

19

तुम्हरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥

20

जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥

21

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥

22

दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥

23

राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥

24

सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥

25

आपन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥

26

भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥

27

नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥

28

सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥

29

सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥

30

और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥

31

चारों जुग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥

32

साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥

33

अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥

34

राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥

35

तुम्हरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

36

अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥

37

और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥

38

सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥

39

जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥

40

जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥

41

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥

42

तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥

43

पवनतनय सङ्कट हरन मङ्गल मूरति रूप ।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥

The Sanskrit is older than any copyright and is set down as it is chanted, checked verse by verse against the count this stotra is known by. Everything said about it here was written for this page.

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