सुबह
कपोल
होंठ कौवे की चोंच जैसे गोल करके हवा भीतर खींचिए, गाल पूरे फुलाइए, ठोड़ी गले के गड्ढे की ओर, और साँस थामिए।
थामना आराम तक, गिनती तक नहीं। फिर साँस धीरे छोड़िए; लंबे थामने के बाद कभी झटके से बाहर नहीं फेंकिए। कुछ बार।
पहली बार शिविर में किसी सिखाने वाले के साथ सीखिए। इसके चित्र अभी नहीं हैं; यह शब्दों में है।
कर्ण
वही, और साँस थमी रहते उँगलियों से कान, आँखें और मुँह बंद। ध्यान मुँह के भीतर।
कान में दर्द हो या कान बहता हो, तो कर्ण नहीं, बस कपोल।
दिन में
गायत्री · ज़ोर से, फिर फुसफुसाकर
ग्यारह बार वाचिक, ज़ोर से; फिर ग्यारह उपांशु, फुसफुसाकर। हर पंक्ति के बीच साँस नाक से।
होंठ, जीभ और गाल हर अक्षर पर पूरा चलें। मुँह काम करता है, पर हवा के लिए खुला नहीं रहता।
खोलिएशाम
आदित्य हृदयम् · पाठ, ज़ोर से
जहाँ पिछली बार रुके थे, वहीं से; पन्ना याद रखता है। कोई गिनती नहीं।
खोलिएघर पर
नाक, पानी, मंजन, और डॉक्टर
दिन भर साँस नाक से; जब ध्यान आए कि मुँह खुला है, बस बंद कर लीजिए।
थोड़ा-थोड़ा पानी, और मीठे के बाद मुँह में पानी घुमाइए। फ़्लोराइड वाला मंजन।
दाँत के डॉक्टर से एक बार, जल्दी, दर्द से पहले। जो छेद बन चुका, उसे वही भरता है।
यह क्रम क्यों
मॉर्फ़ीन आराम की लार घटाती है, और चूहों में उसका असर रोकते ही लार लौटी। लार का कैल्शियम और फ़ॉस्फ़ेट शुरू की सड़न रोक या उलट सकते हैं। खुले मुँह से नमी हवा में उड़ती है। और चेहरे और जीभ की कसरत से बुज़ुर्गों में लार बढ़ी।
शुरू करने से पहले
अपनी सुविधा के भीतर ही कीजिए। ज़रा भी दर्द हो तो रुक जाइए। यह इलाज का साथ देता है, उसकी जगह नहीं लेता; जो ब्यूप्रेनॉर्फ़िन या मेथाडोन पर है, वह उस पर बना रहे।
जब तक अफ़ीम चल रही है, हर बार साँस रोकना छोटा रखिए।